
जनगणना का फॉर्म सामने रखा है। परिवार बैठा है। कोई पूछता है, "धर्म वाले कॉलम में क्या लिखें?" एक बुज़ुर्ग कहते हैं, "जैन लिख दो।" दूसरा रोकता है,
"रुको, कहीं जैन लिखने से OBC का फायदा बंद तो नहीं हो जाएगा?" तीसरा कहता है,
"छोड़ो, हिंदू लिख दो, कोई झंझट नहीं।" यह संवाद काल्पनिक नहीं है। यह पिछले कई दशकों से लाखों जैन घरों में होता आया है। और इसी संवाद की वजह से 2011 की जनगणना में पूरे भारत में केवल 44.5 लाख जैन दर्ज हुए। इस लेख का एक ही उद्देश्य है: उस डर को दूर करना जो हमें अपनी पहचान लिखने से रोकता है।
नहीं। बिल्कुल नहीं। यह वह प्रश्न है जो सबसे ज़्यादा परिवारों को रोकता है। और इसका उत्तर बिल्कुल स्पष्ट है। जनगणना के फॉर्म में धर्म और जाति दो अलग-अलग कॉलम हैं। धर्म के कॉलम में "जैन" लिखने से आपके जाति प्रमाण पत्र पर कोई असर नहीं पड़ता। OBC, SC या
ST का दर्जा आपकी जाति से निर्धारित होता है, आपके धर्म से नहीं। जनगणना में धर्म कॉलम और जाति कॉलम एक दूसरे को प्रभावित नहीं करते।
अगर आप OBC हैं, तो जाति के कॉलम में अपनी जाति लिखें। धर्म के कॉलम में "जैन" लिखें। दोनों सत्य हैं। दोनों एक साथ लिखे जा सकते हैं। SC/ST परिवारों के लिए एक विशेष जानकारी: SC का दर्जा 1950 के
Presidential Order के अंतर्गत फिलहाल उन्हीं लोगों को मिलता है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म मानते हों। यह एक कानूनी स्थिति है जो न्यायालय में विचाराधीन है। जो परिवार SC श्रेणी में आते हैं, वे अपनी परिस्थिति के अनुसार कानूनी सलाह ले सकते हैं। OBC और
ST परिवारों पर यह प्रावधान लागू नहीं होता।
Census
Act, 1948 की
धारा 15 के अनुसार
जनगणना
में
दिया
गया
व्यक्तिगत
विवरण
गोपनीय
है
और
किसी
भी
न्यायालय
या
कार्यवाही
में
साक्ष्य
के
रूप
में
स्वीकार्य
नहीं
है।
आपका
जाति
प्रमाण
पत्र
राजस्व
अधिकारी
को
दिए
आपके
अलग
आवेदन
पर
बनता
है, जनगणना
के
रिकॉर्ड
पर
नहीं। यह भ्रम दशकों से जैन समाज को जनगणना में अदृश्य रखता आया है। अब वक्त है इसे दूर करने का।
जनगणना 2027 में जैन समुदाय की भूमिका समझने के लिए देखें: Jain
Census 2027
धर्म के कॉलम में लिखिए: जैन। न
गोत्र, न जाति
का
नाम, न
हिंदू-जैन। सिर्फ
जैन। जनगणना में
सम्प्रदाय
भी
नहीं
पूछा
जाता।
दिगंबर
हों
या
श्वेतांबर, स्थानकवासी हों
या
तेरापंथी, धर्म के
कॉलम
में
उत्तर
एक
ही
है: जैन। यह कोई राजनीतिक बयान नहीं है। यह वह सत्य है जो हमारे घरों में, हमारे मंदिरों में, हमारे आचार में, और हमारी परंपरा में हज़ारों साल से जीवित है। जो गिनती में है,
वही नीति में है। जो दिखता है, वही बचता है। पहली बार, गिनती हमारे अपने हाथ में है।
92898-11008 पर एक मिस्ड कॉल दें और Let Every Jain Count अभियान से जुड़ें। अधिक जानकारी के लिए leteveryjaincount.info पर जाएं।
जय जिनेन्द्र।
Ahimsa Foundation warmly welcomes information, photographs, literature, articles, and other meaningful contributions for publication on this web portal: www.jainsamaj.org | ✉ CAINDIA@HOTMAIL.COM
We also invite advertisements and sponsorship support to help us expand the reach of this social initiative and promote public awareness of Jain ideology.
Related
Related
Related