पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ पà¥à¤°à¥‚शोतम उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ पà¥à¤·à¥à¤•र मà¥à¤¨à¤¿à¤œà¥€
उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ शà¥à¤°à¥€ के पौतà¥à¤° शिषà¥à¤¯, पà¥à¤·à¥à¤ªà¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿à¤œà¥€
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जनà¥à¤® दिवस पर विशेष : 9 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर 2011
सà¤à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤• समान नहीं होते हैं। कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤à¤‚ होते हà¥à¤ à¤à¥€ वे अपने कारà¥à¤¯à¥‡à¤‚ में सफलता अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ नहीं कर पाते हैं और कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ होते हैं जिनमें परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤à¤‚ नहीं होती है, फिर à¤à¥€ वे कठोर परिशà¥à¤°à¤® à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤¦à¥ƒà¥ मनोबल के सहारे सफलता अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कर लेते हैं। दूसरे शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में हम यह à¤à¥€ कह सकते हैं कि मनà¥à¤·à¥à¤¯ की सफलता उसके पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ पर निरà¥à¤à¤° करती है। कहा गया है कि रसरी आवत जात से सिल पर पड़त निसान। à¤à¤• कोमल रसà¥à¤¸à¥€ जब बार-बार किसी कठोर चटà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨ को घिसते हà¥à¤ उसे काट सकती है तो फिर मनà¥à¤·à¥à¤¯ सफलता अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं कर सकता? अवशà¥à¤¯ करता है, केवल उसे पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है।
जब हम साधना के शिखर पà¥à¤°à¥à¤· विशà¥à¤µà¤¸à¤‚त उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤·à¥à¤•र मà¥à¤¨à¤¿ जी म. के जीवन पर दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤ªà¤¾à¤¤ करते हैं तो जà¥à¤žà¤¾à¤¤ होता है कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ के माधà¥à¤¯à¤® से ही जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और साधना के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में उचà¥à¤š सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया। पूजà¥à¤¯ उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ के जीवन पर हम सांकेतिक रूप से विचार कर अपने कथन की पà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ करना चाहते हैं।
यह सरà¥à¤µ विदित है कि पू. उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ का जनà¥à¤® बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ परिवार में हà¥à¤† था। इस कारण वे जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ के लिठसजग थे। जैन à¤à¤¾à¤—वती दीकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ गà¥à¤°à¥à¤“ं के सानà¥à¤¨à¤¿à¤§à¥à¤¯ में रहकर जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया। इसके लिये उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¤à¥€ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¦ नहीं किया। जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤œà¤¨ करने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ वे अपने जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की पà¥à¤¨à¤°à¤¾à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ नियमित रूप से करते थे। इसके लिठनियमित सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯, पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ और लेखन वे करते रहते थे। परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प आज उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचित विपà¥à¤² साहितà¥à¤¯ उपलबà¥à¤§ है और कालानà¥à¤¤à¤° में जब उनके शिषà¥à¤¯ और पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤·à¥à¤¯ हà¥à¤ तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤•ार से जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤œà¤¨ कराया। परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प उनके à¤à¤• शिषà¥à¤¯à¤°à¤¤à¥à¤¨ आचारà¥à¤¯ पद पर पदासीन किये गये। ये ही आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ देवेनदà¥à¤°à¤®à¥à¤¨à¤¿à¤œà¥€ म. à¤à¤• पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ साहितà¥à¤¯ मनीषी के रूप में à¤à¥€ पà¥à¤°à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¤ हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अनेक कालजयी गà¥à¤°à¤‚थ रतà¥à¤¨à¥‹à¤‚ की रचना कर à¤à¤• कीरà¥à¤¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया। उनके अनà¥à¤¯ शिषà¥à¤¯ और पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤·à¥à¤¯ à¤à¥€ जà¥à¤žà¤¾à¤¨ के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में अपनी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा अरà¥à¤œà¤¿à¤¤ कर चà¥à¤•े हैं और कर रहे हैं। उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ का शà¥à¤°à¤®à¤£à¥€ परिवार à¤à¥€ उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ है और वे परम विदà¥à¤·à¥€ है तथा अपने गà¥à¤°à¥à¤µà¤° के नाम को उजà¥à¤œà¥à¤µà¤² कर रहा है।
पू.उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ समाज और शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ की à¤à¤•ता और संगठन के महतà¥à¤¤à¥à¤µ को à¤à¤²à¥€à¤à¤¾à¤‚ति समà¤à¤¤à¥‡ थे। जिस समय शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ की à¤à¤•ता की चरà¥à¤šà¤¾ चल रही थी, उस समय आप यà¥à¤µà¤¾ ही थे और अपनी जà¥à¤žà¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚ संयम साधना के लिठचरà¥à¤šà¤¿à¤¤ हो गये थे। शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ की à¤à¤•ता के लिये आपने à¤à¤• सेतॠका काम किया। आपके अथक परिशà¥à¤°à¤® का परिणाम यह हà¥à¤† कि सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤•वासी जैन समà¥à¤ªà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के अनेक आचारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ /संघ पà¥à¤°à¤®à¥à¤–ों ने शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ की à¤à¤•ता के लिये à¤à¤• सà¥à¤µà¤° में समरà¥à¤¥à¤¨ किया और अपने-अपने पदों का विसरà¥à¤œà¤¨ à¤à¥€ कर दिया। अंतत: शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ का गठन हà¥à¤†à¥¤ उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय यह है कि अनà¥à¤¯ अनेक शà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ के मà¥à¤•ाबले कम आयॠके होने के बावजूद आपको शिकà¥à¤·à¤¾ मंतà¥à¤°à¥€ का उतà¥à¤¤à¤°à¤¦à¤¾à¤¯à¤¿à¤¤à¥à¤µ सौंपा गया। आप अपने जीवन के अंतिम समय तक शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ की à¤à¤•ता के लिठकठोर अधà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ करते रहे।
साधना के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पू.उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ साधना और जप साधना की महतà¥à¤¤à¤¾ से à¤à¥€ परिचित थे। इसलिये आपने अपने संयमी जीवन में जप और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ साधना को विशेष सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ दिया। आपकी नियमित धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚ जप साधना का परिणाम à¤à¥€ देखने को मिला। यह सरà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¤¿à¤¤ है कि जैन शà¥à¤°à¤®à¤£ कà¤à¥€ à¤à¥€ अपनी लबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ नहीं करते हैं। पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ तो ठीक, वे कà¤à¥€ इस संबंध में किसी से चरà¥à¤šà¤¾ तक नहीं करते हैं। किनà¥à¤¤à¥ जिस साधक को लबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ उपलबà¥à¤§ हो जाती हैं, वे सà¥à¤µà¤¤: उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दी जाने वाली मांगलिक के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¤•ट होने लगती है। पू.उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€à¤œà¥€ म. के संबंध में à¤à¥€ हम यह कह सकते हैं कि धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¤µà¤‚ जप की साधना से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› लबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ थी। उनके जीवन में अनेक पà¥à¤°à¤•ार के चमतà¥à¤•ार घटित हà¥à¤à¥¤ उनकी मांगलिक से अनेक à¤à¤µà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के कषà¥à¤Ÿ दूर हà¥à¤à¥¤ अनेक गà¥à¤°à¥à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ के कारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ हà¥à¤à¥¤ उनकी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ और मंगल वचन से अनेक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर कलह के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर à¤à¥€ मैतà¥à¤°à¥€ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ हà¥à¤ˆà¥¤ विशेष उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय है कि पू.उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ अनेक वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से 12 बजे के समय धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ साधना के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤à¥ मांगलिक फरमाया करते थे जिसका अचिनà¥à¤¤à¥à¤¯ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ देखने को à¤à¥€ मिला। आपकी मांगलिक शà¥à¤°à¤µà¤£ से अनेक à¤à¤µà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अनसोचा लाठमिला। उनकी समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं का अनायास ही समाधान हो गया और आगे का मारà¥à¤— पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ हो गया।
पू.उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ ने समाज सà¥à¤§à¤¾à¤° के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में à¤à¥€ उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय कारà¥à¤¯ किये। इस कारà¥à¤¯ के लिये उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पृथक से कोई पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं करने पड़े। उनके वचनों का ही à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ था कि सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ वाला सà¥à¤µà¤¤: उनके आदेश का पालन करने के लिठततà¥à¤ªà¤° हो जाया करता था। शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¤¾ उनके वचनों को आदेश मानकर उसके अनà¥à¤°à¥‚प अनà¥à¤¸à¤°à¤£ करने में अपना कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ समà¤à¤¤à¤¾ था और वैसा होता ही था।
आज पू.उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¶à¥à¤°à¥€ हमारे बीच नहीं हैं, किनà¥à¤¤à¥ उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचित साहितà¥à¤¯ के माधà¥à¤¯à¤® से हमें उनके विचार आज à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते रहते हैं। à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• रूप से वे à¤à¤²à¥‡ ही नहीं हों, किनà¥à¤¤à¥ वैचारिक रूप से आज à¤à¥€ हमें आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ कर रहे हैं। वे सही अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® थे। मैं âदय की गहराई से अपने दादा गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ को सादर सशà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾, सà¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤‚जलि अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करता हूà¤à¥¤ यही कामना है कि उनका दिवà¥à¤¯ आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ सदा बना रहे।
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Information Courtesy : Saint Shri Pushpendra Muniji Maharaj, Swetamber, Sthankwashi Sect
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Article Uploaded on 9th September, 2011
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