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जल : हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती

महावीर इंटरनेशनल के 52वें स्थापना दिवस पर विशेष संदेश

वीर सीए अनिल के. जैन
ज़ोन उपाध्यक्ष एवं जल संरक्षण सह-निदेशक


जल : जीवन का आधार

महावीर इंटरनेशनल के 52वें स्थापना दिवस के अवसर पर मानवता के समक्ष उपस्थित सबसे महत्वपूर्ण विषय—जल—पर चिंतन करना अत्यंत प्रासंगिक है। जैन दर्शन का शाश्वत सिद्धांत "परस्परोपग्रहो जीवानाम्" हमें स्मरण कराता है कि समस्त जीवन परस्पर एक-दूसरे पर निर्भर है। इस सत्य का सबसे बड़ा उदाहरण जल है, जो मानव जीवन, कृषि, उद्योग, पर्यावरण तथा आर्थिक विकास का मूल आधार है।


नीले ग्रह की वास्तविकता

यद्यपि पृथ्वी को "नीला ग्रह" कहा जाता है, परंतु इसकी लगभग 97 प्रतिशत जलराशि खारे पानी के रूप में है। शेष मीठे जल का बड़ा भाग हिमनदों और बर्फ की चट्टानों में बंद है। मानव उपयोग के लिए उपलब्ध जल की मात्रा अत्यंत सीमित है और वह भी बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन तथा भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण निरंतर संकटग्रस्त होती जा रही है। यही कारण है कि जल संकट इक्कीसवीं सदी की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है।


भारत का जल-विरोधाभास

भारत विश्व की महान नदी प्रणालियों से समृद्ध देश है। गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी तथा अनेक अन्य नदियाँ विशाल मात्रा में मीठा जल देश के विभिन्न भागों तक पहुँचाती हैं। इसके बावजूद देश के करोड़ों लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं।

गर्मियों में अनेक गाँव टैंकरों पर निर्भर हो जाते हैं, शहरों के जलाशय सूखने लगते हैं और किसानों को सिंचाई के लिए 500 से 600 फीट अथवा उससे अधिक गहराई से पानी निकालना पड़ता है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत की समस्या जल की उपलब्धता की नहीं, बल्कि उसके वैज्ञानिक प्रबंधन, संरक्षण, संग्रहण, पुनर्भरण तथा कुशल उपयोग की है।


सरकार के प्रयास और उपलब्धियाँ

भारत सरकार तथा विभिन्न राज्य सरकारों ने जल संरक्षण और जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएँ प्रारम्भ की हैं। जल जीवन मिशन, अटल भूजल योजना, नमामि गंगे कार्यक्रम, जलागम विकास परियोजनाएँ तथा वर्षाजल संचयन अभियान इस दिशा में उल्लेखनीय प्रयास हैं।

इन योजनाओं ने पेयजल उपलब्धता बढ़ाने और जन-जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फिर भी भूजल का निरंतर गिरता स्तर, जल प्रदूषण, जल का अपव्यय तथा मानसून पर अत्यधिक निर्भरता जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं।


विश्व से मिलने वाली प्रेरणा

विश्व के अनेक देशों ने यह सिद्ध किया है कि जल संकट का समाधान संभव है। इज़राइल ने सीमित वर्षा के बावजूद ड्रिप सिंचाई, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण, समुद्री जल विलवणीकरण तथा भूजल पुनर्भरण के माध्यम से जल सुरक्षा का उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत किया है।

सिंगापुर ने प्राकृतिक जल संसाधनों की कमी के बावजूद वर्षाजल संचयन, उन्नत जल पुनर्चक्रण तकनीकों और विलवणीकरण संयंत्रों के माध्यम से जल आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। ऑस्ट्रेलिया ने एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन, जल दक्षता और भूजल पुनर्भरण कार्यक्रमों द्वारा अपनी जल सुरक्षा को मजबूत किया है।


दक्षिण अफ्रीका से मिली सीख

दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में उत्पन्न "डे-ज़ीरो" संकट ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी कि आधुनिक शहर भी गंभीर जल संकट का सामना कर सकते हैं। किंतु कठोर जल संरक्षण उपायों, जनभागीदारी, पारदर्शी प्रशासन और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से शहर ने इस संकट को टाल दिया।

यह उदाहरण दर्शाता है कि जल संकट केवल प्रकृति की देन नहीं है; यह प्रबंधन और शासन का भी विषय है।


भूजल : प्रकृति का अदृश्य भंडार

आज विश्वभर के जल विशेषज्ञ भूजल पुनर्भरण को दीर्घकालिक जल सुरक्षा का महत्वपूर्ण साधन मानते हैं। भूजल जलभृत (Aquifers) पृथ्वी के भीतर स्थित विशाल प्राकृतिक जलाशय हैं, जिनमें अत्यधिक मात्रा में जल संग्रहीत किया जा सकता है।

सतही जलाशयों की तुलना में इनमें वाष्पीकरण की हानि नगण्य होती है। इसी कारण अनेक देश अपने सूखते हुए भूजल भंडारों को पुनर्जीवित करने के लिए वैज्ञानिक भूजल पुनर्भरण कार्यक्रमों में निवेश कर रहे हैं।


नदी जल पुनर्भरण : भारत के लिए एक रणनीतिक अवसर

भारत की नदियाँ प्रतिवर्ष विशाल मात्रा में मीठा जल देश के विभिन्न भागों से होकर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक पहुँचाती हैं। नदी प्रवाह पर्यावरणीय संतुलन के लिए आवश्यक है, परंतु अतिरिक्त जल प्रवाह के समय वैज्ञानिक तरीके से भूजल पुनर्भरण की अपार संभावनाएँ भी मौजूद हैं।

विशेष रूप से निर्मित रिचार्ज कुओं, इन्फिल्ट्रेशन गैलरी, रिचार्ज बेसिन तथा रिवर बैंक फिल्ट्रेशन प्रणालियों के माध्यम से अतिरिक्त नदी जल को सूखते हुए जलभृतों तक पहुँचाया जा सकता है। यूरोप, उत्तर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इज़राइल सहित अनेक देशों में ऐसी प्रणालियाँ विभिन्न रूपों में सफलतापूर्वक अपनाई गई हैं।

यदि वैज्ञानिक ढंग से योजना बनाकर इसे लागू किया जाए, तो नदी जल पुनर्भरण भूजल स्तर बढ़ाने, गहरे बोरवेलों पर निर्भरता कम करने, कृषि को सशक्त बनाने, सूखे की स्थिति से मुकाबला करने और देश की दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


जनभागीदारी की आवश्यकता

जल संरक्षण का कार्य केवल सरकारों पर नहीं छोड़ा जा सकता। समाज, नागरिक संस्थाएँ, उद्योग और आम जनता सभी की सहभागिता आवश्यक है। जब तक प्रत्येक नागरिक जल को एक अमूल्य संपदा मानकर उसके संरक्षण का संकल्प नहीं लेता, तब तक स्थायी समाधान संभव नहीं है।


महावीर इंटरनेशनल की भूमिका

महावीर इंटरनेशनल अपने व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क के माध्यम से जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। संस्था जल साक्षरता को बढ़ावा दे सकती है, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण परियोजनाओं को प्रोत्साहित कर सकती है, पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन कर सकती है तथा जन-जागरूकता अभियान चला सकती है।


जागरूकता से जल-आंदोलन तक

महावीर इंटरनेशनल की स्थानीय शाखाएँ विद्यालयों, सामुदायिक भवनों तथा सार्वजनिक संस्थानों में जल संरक्षण और रिचार्ज की मॉडल परियोजनाएँ स्थापित कर सकती हैं। छोटे-छोटे प्रयास भी प्रतिवर्ष लाखों लीटर जल को धरती में वापस पहुँचा सकते हैं।

इस प्रकार संस्था "जल संस्कार" की भावना विकसित कर सकती है और आने वाली पीढ़ियों को जल संरक्षण का संदेश दे सकती है।


भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी

मानवता का भविष्य केवल तकनीकी प्रगति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगा कि हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का कितना विवेकपूर्ण उपयोग करते हैं।

जल केवल पर्यावरण का विषय नहीं है; यह आर्थिक विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आधार है।

विश्व के अनेक देशों ने सिद्ध किया है कि विज्ञान, नवाचार, जनभागीदारी और उत्तरदायी शासन के माध्यम से जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


स्थापना दिवस पर हमारा संकल्प

महावीर इंटरनेशनल के 52वें स्थापना दिवस पर आइए हम सभी जल संरक्षण का संकल्प लें। प्रत्येक सदस्य जल का प्रहरी बने, प्रत्येक शाखा जागरूकता का केंद्र बने और प्रत्येक समुदाय सतत विकास का सहभागी बने।


निष्कर्ष : जल ही जीवन है

जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। आज हम जो निर्णय लेंगे, वही आने वाली पीढ़ियों का भविष्य निर्धारित करेंगे। इसलिए जल संरक्षण को केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक कर्तव्य के रूप में स्वीकार करना होगा।

जल है तो कल है।
जल जीवन है, जल समृद्धि है, जल हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।


VIR CA Anil K Jain
Zone Vice-Chairman & Co-Director of Water Conservation
Cell: +91 9810046108



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