आचारà¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज का जीवन वृतà¥à¤¤
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à¤à¤¾à¤°à¤¤ की वसà¥à¤‚धरा ने समय-समय पर à¤à¤¸à¥‡ महापà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ को जनà¥à¤® दिया जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी साधना तथा तप दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जनमानस पर सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ छोड़ा। à¤à¤¸à¥‡ महापà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में अधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤® साधना के शिखर पà¥à¤°à¥à¤· आचारà¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ शà¥à¤°à¥€ देवेनà¥à¤¦à¥à¤°à¤®à¥à¤¨à¤¿ जी महाराज का नाम à¤à¥€ लिखा जाà¤à¤—ा। आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ अपने बà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ और कà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के रूप में संघ समाज और देश के गौरव के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• थे। अपने जीवन में समाज और राषà¥à¤Ÿà¥à¤° का पथ- पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया।
जनà¥à¤® : आपकी माताजी शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ तीज कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ जी को à¤à¤• मधà¥à¤¯à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿ में à¤à¤• अदà¥à¤à¥à¤¤ सà¥à¤µà¤ªà¥à¤¨ में जिसमें दिबà¥à¤¯ विमान हषà¥à¤Ÿà¤¿à¤—त हà¥à¤µà¤¾ और अतà¥à¤¯à¤‚त ही मानसिक शांति और सà¥à¤– का अनà¥à¤à¤µ हà¥à¤†à¥¤ अपने पति शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ जीवनसिंह जी बरडिया को सपने की बात बताई। सà¥à¤µà¤ªà¤¨ फल बताने वालों से जानकारी निकलवाई। जà¥à¤žà¤¾à¤¤ हà¥à¤† कि à¤à¤• महान पà¥à¤£à¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¨ पà¥à¤¤à¥à¤° की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होने वाली है तà¥à¤® à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ जननी उस पà¥à¤¤à¥à¤° की रहोगी। आने वाला जीव मानव की सेवा करेगा, जीवो को अà¤à¤¯ दान देगा, जन-जन में धरà¥à¤® धमय की रौशनी को बà¥à¤¾à¤à¤—ा। यह सब सà¥à¤¨ पूरा परिवार खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤² माहौल में समय बिता रहा था और वह शà¥à¤ घड़ी विकà¥à¤°à¤® संवत 1988 की कारà¥à¤¤à¤¿à¤• कृषà¥à¤£ तà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤¦à¤¶à¥€ धनतेरस ( 8 नवमà¥à¤¬à¤° 1931) को बरडिया दंपति के घर आंगन उदयपà¥à¤° नगरी दिबà¥à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤° रतà¥à¤¨ की पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¤¾à¤œà¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤ˆà¥¤ पूजà¥à¤¯ आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज साहब पर तेरस और तीज दोनों का मांगलिक योग सहज ही हो गया था। तेरस को आप ने जनà¥à¤® लिया और तीज को दीकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¤¹à¤£ की यह आप शà¥à¤°à¥€ के à¤à¤¾à¤µà¥€ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• उतà¥à¤•रà¥à¤· का à¤à¤• सशकà¥à¤¤ पूरà¥à¤µ संकेत ही था। धितेरस के दिन आपका जनà¥à¤® होने की वजह से आपका नाम धनà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤¾à¤² रखा गया।
पितृ वियोग : विधि के विधान के आगे किसी का à¤à¥€ जोर नहीं है। आपके धरà¥à¤®à¤¶à¥€à¤² पिता शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ जीवन सिंह जी बरडिया का देहांत उस समय ही हो गया जब आप मातà¥à¤° 21 दिन के थे। संगà¥à¤°à¤¹à¤£à¥€ जैसी बीमारी से गंà¤à¥€à¤° रà¥à¤—à¥à¤£ हो कर संथारा सदहत 28 नवमà¥à¤¬à¤° 1931 को आपके पिता का सà¥à¤µà¤°à¥à¤—वास हो गया।
बहन की दीकà¥à¤·à¤¾ : माता शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ तीज कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ अपने पà¥à¤¤à¥à¤° और पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ का लालन- पालन धारà¥à¤®à¤¿à¤• संसà¥à¤•ारों के साथ कर रही थी। वह अपने पà¥à¤¤à¥à¤° और पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ को लेकर उदयपà¥à¤° में विराजित महासती शà¥à¤°à¥€ मदनकà¥à¤‚वर जी महाराज तथा महाशà¥à¤°à¤®à¤£à¥€ शà¥à¤°à¥€ सोहनकà¥à¤‚वर जी महाराज के दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤¥ जाती रहती थी। इस पà¥à¤°à¤•ार सà¥à¤‚दरी कà¥à¤‚वर और धनà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤¾à¤² के मानस में जैन संसà¥à¤•ार पà¥à¤°à¤« पà¥à¤°à¤«à¥à¤²à¥à¤²à¤¿à¤¤ हो गà¤à¥¤ फलसà¥à¤µà¤°à¥‚प सà¥à¤‚दरी कà¥à¤‚वर ने 12 फरवरी 1938 में गà¥à¤°à¥‚नी महासती शà¥à¤°à¥€ सोहन कà¥à¤‚वर जी महाराज के सानिधà¥à¤¯ में दीकà¥à¤·à¤¾ धारण की। आपको महाशà¥à¤°à¤®à¤£à¥€ साधà¥à¤µà¥€ पà¥à¤·à¥à¤ªà¤µà¤¤à¤¿ जी महाराज नाम दिया गया।
बालपन और बालक धनà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤¾à¤² की बाल कà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¾à¤à¤‚ : विकà¥à¤°à¤® संवत 1991 कपासन कपासि गà¥à¤°à¤¾à¤® में पूजà¥à¤¯ आचारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤° जवाहरलाल जी महाराज विराजित थे। à¤à¤• दिन महाराज साहब के रिकà¥à¤¤ पाट के समीप आपके दादाजी शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¾à¤¨ कनà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾à¤²à¤¾à¤² जी बरडिया सामायिक साधना में बैठे थे। पाट के समीप ही बचà¥à¤šà¥‡ खेल रहे थे। चंचल बालक धनà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤¾à¤² अचानक आचारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤° के उस पाट पर बैठगठऔर अपने साथी साथियों को नीचे बिठाकर पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨ देने का अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ करने लगे। इस बाल कà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¾ को देखकर आचारà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤µà¤° तीन वरà¥à¤·à¥€à¤¯à¤¾ बालक धनà¥à¤¨à¤¾à¤²à¤¾à¤² से बडे पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤ बालक के दादाजी से बोल कि-यह बालक दीकà¥à¤·à¤¾ ले, तो तà¥à¤® बाधा मत डालना। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ लाल जी महाराज के इस कथन का उलà¥à¤²à¥‡à¤– à¤à¥€ किया कि बरडिया परिवार से दीकà¥à¤·à¤¾ होगी और वह आतà¥à¤®à¤¾ आगे चलकर धरà¥à¤®à¥‹à¤‚-जà¥à¤¯à¥‹à¤¤ करेगा। यह बाल कà¥à¤°à¥€à¤¡à¤¾ सतà¥à¤¯ सिदà¥à¤§ होगी और बालक धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में जैन समाज के सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š पद का अधिकार हो जाà¤à¤—ा उस समय à¤à¤²à¤¾ कौन जनता था। बालक धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² की बाल कà¥à¤°à¥€à¤¯à¤¾à¤à¤‚ à¤à¥€ खेल-खेल में साधॠबन जाना, à¤à¥‹à¤²à¥€ लेकर गोचरी निकल जाना, आदि रहती थी। दीकà¥à¤·à¤¾ के à¤à¤¾à¤µ जागतृ होने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ आपने à¤à¥ˆà¤°à¥‹ बाबा के समकà¥à¤· बोलमा ले ली कि आप विकलांगों को à¤à¥‹à¤œà¤¨ कराà¤à¤‚गे, à¤à¤• सौ बकरों को उमरिया करेंगे, और à¤à¤• सौ दया पलवाà¤à¤‚गे। दीकà¥à¤·à¤¾ पूरà¥à¤µ इिन वचनों की पूरà¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€ आप शà¥à¤°à¥€ की। सतà¥à¤¯ है कि महापà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के सदà¥à¤—à¥à¤£ और महानता जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ ही होती है और उनके विकास के लिठअनà¥à¤•ूल परिवेश à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¤: ही शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है। मातà¥à¤° 7 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में बालक धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² को पचà¥à¤šà¥€à¤¸ बोल और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤®à¤£ कंठसà¥à¤¥ याद हो गठथे।
बालक धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² जी की दीकà¥à¤·à¤¾ : संत सतियों के सानिधà¥à¤¯ से आपके वैरागà¥à¤¯ के à¤à¤¾à¤µ गहनतर होते चले गà¤à¥¤ जब बाडमेर जिले के खंडप गà¥à¤°à¤¾à¤® में विकà¥à¤°à¤® संवत 1997 में महासà¥à¤¥à¤µà¥€à¤° पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ ताराचंद जी महाराज और विशà¥à¤µà¤¸à¤‚त पूजà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤·à¥à¤•र मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज का वरà¥à¤·à¤¾à¤µà¤¾à¤¸ था। आपकी माता जी आपको लेकर सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤• में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ और बालक धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² को दीकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने अनà¥à¤—à¥à¤°à¤¹ किया। खंडप के ही सेठशà¥à¤°à¥€à¤°à¤˜à¥à¤¨à¤¾à¤¥à¤œà¥€ धनराज जी लà¥à¤•ड़ ने कई पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¤¶à¥‍न धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² परीकà¥à¤·à¤¾ ली और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दीकà¥à¤·à¤¾ योगà¥à¤¯ घोषित किया। अंततः खंडप शà¥à¤°à¥€ संघ का अनà¥à¤°à¥‹à¤§ होने की वजह से विकà¥à¤°à¤® संवत 1997 फालà¥à¤—à¥à¤¨ शà¥à¤•à¥à¤² तृतीय 01.03.1941 को महासà¥à¤¥à¤µà¥€à¤° शà¥à¤°à¥€ ताराचंद जी महाराज साहब की नीशà¥à¤°à¤¾ में बालक धनà¥à¤¨à¤²à¤¾à¤² को दीकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की गई और दीकà¥à¤·à¤¾ के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ आपका नाम देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ रखा गया। आपको गà¥à¤°à¥ विशà¥à¤µà¤¸à¤‚त पूजà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤·à¥à¤•र मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज का पà¥à¤°à¤¥à¤® शिषà¥à¤¯ à¤à¥€ घोषित किया गया। नव दीकà¥à¤·à¤¿à¤¤ शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी मातà¥à¤° 9 वरà¥à¤· के थे, पदयातà¥à¤°à¤¾ का उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ नहीं था। आपके गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ विशà¥à¤µà¤¸à¤‚त पूजà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤·à¥à¤•र मà¥à¤¨à¤¿ जी महाराज और दादा गà¥à¤°à¥ दीकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ महासà¥à¤¥à¤µà¥€à¤° पूजà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ ताराचंद जी महाराज ने अपने कंधों पर बिठाकर à¤à¥€ विहार किया। मोकलसर में आप शà¥à¤°à¥€ की बड़ी दीकà¥à¤·à¤¾ संपनà¥à¤¨ हà¥à¤ˆ, उस मंगल अवसर पर जैन दिवाकर पूजà¥à¤¯ गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡à¤µ शà¥à¤°à¥€ चौथमल जी महाराज साहब अपने शिषà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ मोकलसर पधारे थे। आपकी बालया-वसà¥à¤¥à¤¾ को देखते हà¥à¤ लोग आपको पà¥à¤¯à¤¾à¤° से à¤à¤µà¤‚तामà¥à¤¨à¤¿ कहकर à¤à¥€ पà¥à¤•ारते थे।
माताशà¥à¤°à¥€ की दीकà¥à¤·à¤¾ : इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ ही इसी वरà¥à¤· विकà¥à¤°à¤® संवत 1997 आषाढ़ शà¥à¤•à¥à¤² तृतीया को आपकी माताजी शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ तीज कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ जी ने à¤à¥€ महासती शà¥à¤°à¥€ सोहन सोहि कà¥à¤‚वर जी महाराज के पावन सनà¥à¤§à¤¿à¤¯ में संयम गà¥à¤°à¤¹à¤£ कर लिया और आपको महासती पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¤à¥€ के नाम से पहचाना जाने लगा।
शिकà¥à¤·à¤¾ / अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ : गà¥à¤°à¥ सानिधà¥à¤¯ में बैठकर बाल मà¥à¤¨à¤¿ शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करने लगे। आपकी अतà¥à¤¯à¤‚त तीवà¥à¤° बà¥à¤¦à¥à¤§à¥€ थी जिस à¤à¤¾à¤·à¤¾ का अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ किया कà¥à¤› ही समय में उसमें पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£à¤¤à¤¾ हासिल कर ली। और हिंदी, संसà¥à¤•ृत, पà¥à¤°à¤¾à¤•ृत, पाली, गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤à¥€ और मराठी à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं के जà¥à¤žà¤¾à¤¤à¤¾ बन गà¤à¥¤ इन à¤à¤¾à¤·à¤¾à¤“ं पर आपका पà¥à¤£ अधिकार था। आपके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जैन आगम, वेद, उपनिषद, पिटक, वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ ( नीति ), दरà¥à¤¶à¤¨ ( फिलोसैपी ), साहितà¥à¤¯ ( लिटà¥à¤°à¤šà¤° ), हिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ आदि का गहन अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया गया।
कà¥à¤¶à¤‚ल लेखक : आप à¤à¤• सिदà¥à¤§-हसà¥à¤¤ लेखक थे। धरà¥à¤® धमय और दरà¥à¤¶à¤¨ आपके पà¥à¤°à¤¿à¤¯ विषय रहे जिन पर आपने अनेक वृहद गà¥à¤°à¤‚थ समाज और देश को दिà¤à¥¤ ये गà¥à¤°à¤‚थ पूण रूप सोध परक अकà¥à¤·à¤¯ निधि हैं जो जनसाधारण के साथ-साथ सोध छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¥€ उपयोगी है। धरà¥à¤® और दरà¥à¤¶à¤¨ के साथ-साथ 9 उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸, 14 निबंध, और 21 कहानियां à¤à¥€ आपकी लेखनी से रचे गà¤à¥¤ अनेक गà¥à¤°à¤‚थों का संपादन à¤à¥€ आपने सहजता और सरलता से किया। आगमों पर आप दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लिखी गई विशाल à¤à¥‚मिका पढ़कर पाठक चकित हो जाते हैं, और आपके गंà¤à¥€à¤° जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की मà¥à¤•à¥à¤¤à¤•ंठसे पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा करते हैं। आप जैन और जैनतर जगत में*शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€* के नाम से पहचाने जाने लगे।
पà¥à¤°à¤•ाशित गà¥à¤°à¤‚थ : करà¥à¤® विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ ( à¤à¤¾à¤— 1 से 9 ) / जैन निति शासà¥à¤¤à¥à¤° / à¤à¤—वान महावीर à¤à¤• अनà¥à¤¶à¥€à¤²à¤¨ / अरिषà¥à¤Ÿà¤¨à¥‡à¤®à¥€ करà¥à¤®à¤¯à¥‹à¤—ी शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£à¤¾, à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ वांगà¥à¤®à¤¯ में नारी / विकà¥à¤°à¤®à¤¾à¤¦à¤¿à¤¤à¥à¤¯ की गौरव गाथा आदि, ( लगà¤à¤— 400 बà¥à¤•à¥à¤¸ )
संपादन :
जैन धरà¥à¤® का मौलिक इतिहास-जयपà¥à¤° से पà¥à¤°à¤•ाशित।
32 आगम-बà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤° से पà¥à¤°à¤•ाशित,
जैन कथा ( à¤à¤¾à¤— 1 से 111 ) - तारक गà¥à¤°à¥ जैनगà¥à¤°à¤‚थालय, उदयपà¥à¤° से पà¥à¤°à¤•ाशित, उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¯à¤¨ सूतà¥à¤° ( लेखक: डॉ. राजेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ ) और अनà¥à¤¯ कई जीवनी ( मासिक अंक ) जयपà¥à¤° से पà¥à¤°à¤•ाशित।
जà¥à¤žà¤¾à¤¨ और आचार का सà¥à¤®à¥‡à¤² : बिना आचार के जà¥à¤žà¤¾à¤¨ पंगॠहै, इस सतà¥à¤¯-सतà¥à¤¯ के आप जà¥à¤žà¤¾à¤¤à¤¾ थे। इसलिठआप वही कहते और लिखते थे जिसमें आप अपने आचार के सà¥à¤µà¤° देते थे। आपकी संयमनिषà¥à¤ ा अदà¥à¤à¥à¤¤ थी। संयम को जीना और उसी का पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤°-पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° करना आपके जीवन का मूल मंतà¥à¤° था।
उपाचारà¥à¤¯ पद : शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ के दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ पटà¥à¤Ÿà¤§à¤° आचारà¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि जी महाराज का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ à¤à¥€ धरà¥à¤® ततà¥à¤µ के हसà¥à¤¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¾ और रचनातà¥à¤®à¤• बà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के धनी आप शà¥à¤°à¥€ की ओर आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ हà¥à¤† आचारà¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ के गहन à¤à¤µà¤‚ सूकà¥à¤·à¥à¤® निरीकà¥à¤·à¤£-परीकà¥à¤·à¤£ में आप शà¥à¤°à¥€ की गतिविधियों,- पà¥à¤°à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚,- बà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ, पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ à¤à¤µà¤‚ उपलबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को सरà¥à¤µà¥‹à¤ªà¤°à¤¿ à¤à¤µà¤‚ उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿà¥à¤Ÿ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ आचारà¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ मानविन à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ कर ली थी कि-देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी ही मेरे उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ारी होने की यथारà¥à¤¥ और समà¥à¤šà¤¿à¤¤ पातà¥à¤°à¤¤à¤¾ रखते हैं। पà¥à¤£à¥‡ संत समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ में अरà¥à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि जी महाराज सा. ने शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ के समसà¥à¤¤ पदाधिकारियों तथा पà¥à¤°à¤®à¥à¤– साधà¥-साधà¥à¤µà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤•-शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤•ाओं, à¤à¤µà¤® चतà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ संघ से परामरà¥à¤¶ कर 12 मई 1987 को घोषित किया *शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ शà¥à¤°à¥€ को शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ का उपाचारà¥à¤¯* मनोनीत किया जाता है सà¥à¤µà¤¯à¤‚ आचारà¥à¤¯ समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ शà¥à¤°à¥€ ने उपाचारà¥à¤¯ पद की चादर à¤à¥€ उड़ाई।
आचारà¥à¤¯ पद : आचारà¥à¤¯ à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€ आनंद ऋषि महाराज के सà¥à¤µà¤°à¥à¤—वास के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ शà¥à¤°à¤®à¤£ संघ की मरà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° आप उपाचारà¥à¤¯ से आचारà¥à¤¯ पद पर दिनांक 15 मई 1992, अकà¥à¤·à¤¯ तृतीया, विकà¥à¤°à¤® संवत 2041 सोजत, मारवाड़ ( राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ ) में पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित हà¥à¤à¥¤ इसके शलठवरिषà¥à¤ शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤•ों उदयपà¥à¤° नगर ( राज. ) में à¤à¤• महाआयोजि किया। 28 मारà¥à¤š 1993 के दिन समायोजित इस समारोह में सैकडों साधà¥-साधà¥à¤µà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और लाखों शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤•-शà¥à¤°à¤¾à¤µà¤¿à¤•ाओं की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में आपको आचारà¥à¤¯ आचायय पद की गरिमा, महिमा और समà¥à¤®à¤¾à¤¨ की चादर पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की गई। उदयपà¥à¤° नगरी को अपने à¤à¤• महान सपूत परम शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¥‡à¤¯ शà¥à¤°à¥€ आचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ जी का अà¤à¤¿à¤¨à¤‚दन करने का अवसर पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤
चहà¥à¤‚मà¥à¤–ी विवकास : आपके शासन काल में शà¥à¤°à¤®à¤£à¤¸à¤‚घ चहà¥à¤‚मà¥à¤–ी विकास किया। सà¥à¤¥à¤¾à¤¨- सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¤¿ पर सà¥à¤µà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की और अपनी पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ से समाज को नई दिशा पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की। अनेक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में चल रहे विवादों को अपने हल किया। वसà¥à¤¤à¥à¤¤: आपका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ ही à¤à¤¸à¤¾ था कि सब आपके समà¥à¤®à¤–ॠनतमसà¥à¤¤à¤• हो जाते थे।
संसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ : 1. शà¥à¤°à¥€ तारक गà¥à¤°à¥ जैन गà¥à¤°à¤‚थालय, उदयपà¥à¤°-1966
2. शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤·à¥à¤•र गà¥à¤°à¥ चिकितà¥à¤¸à¤¾à¤²à¤¯, किशनगढ़-1982
3. शà¥à¤°à¥€ पà¥à¤·à¥à¤•र गà¥à¤°à¥ महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯, किशनगढ़-1989
इंसà¥à¤ªà¤¾à¤¯à¤¿à¤¯ / à¤à¤¸à¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¥à¤²à¤¿à¤¶à¤¡ फैकलà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¤‚ड अवारà¥à¤¡ :
1. डिपारà¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट ऑफ जैनोलॉजी पà¥à¤£à¥‡ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ ( महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° ), 1975
2. गोलà¥à¤¡ मेडल अवारà¥à¤¡ हिंदी, पà¥à¤£à¥‡ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ ( महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° )
कà¥à¤² चातà¥à¤°à¥à¤®à¤¾à¤¸ : 58
दीकà¥à¤·à¤¾ साधॠ/ साधà¥à¤µà¥€ : 54
मंगल यातà¥à¤°à¤¾à¤à¤‚ : आपने जनमंगल हेतॠराजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨, हरियाणा, दिलà¥à¤²à¥€, पंजाब, हिमाचल, उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶, मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶, गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤, महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, करà¥à¤¨à¤¾à¤Ÿà¤•, तमिलनाडà¥, आंधà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ आदि पà¥à¤°à¤¾à¤‚त की यातà¥à¤°à¤¾ की और आपके चरण रज पाकर धनà¥à¤¯ हà¥à¤à¥¤
सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ गेसà¥à¤Ÿ ऑनरà¥à¤¸ : मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ सरकार : 1998 à¤à¤µà¤® महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° सरकार : 1999
पà¥à¤°à¤®à¥à¤– मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• : विशà¥à¤µ हिंदू परिषद, नई दिलà¥à¤²à¥€-1989
महापà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤£ / सà¥à¤µà¤—ायरोहण : बैशाख शà¥à¤•à¥à¤² गà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¸, विकà¥à¤°à¤® संवत 2056 ( 26 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² 1999 ) को घाटकोपर मà¥à¤‚बई में पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒ 8:30 बजे पूरà¥à¤£ समाधि à¤à¤¾à¤µ से संलेखना संथारे सहित आपने नशà¥à¤µà¤° देव का विसरà¥à¤œà¤¨ किया। देह से मिटकर à¤à¥€ आप जन-जन के हà¥à¤°à¤¦à¤¯ में अमर बन गà¤à¥¤ आप अपने गà¥à¤£à¥‹à¤‚ के रूप में सदा-सदा इस à¤à¥‚तल पर अमर रहेंगे।
सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤• सà¥à¤¥à¤² : जैनाचारà¥à¤¯ शà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ देवेंदà¥à¤° मà¥à¤¨à¤¿ शिकà¥à¤·à¤£ à¤à¤µà¤‚ चिकितà¥à¤¸à¤¾ शोध संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ टà¥à¤°à¤¸à¥à¤Ÿ, "देवेंदà¥à¤° धाम" मॉडरà¥à¤¨ कामà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸, à¤à¤¨. à¤à¤š. न. 8, उदयपà¥à¤°, राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥¤
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लेखक :- सà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° मारू, इंदौर ( +91 98260 26001)
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